MONOLOUGE
अनजान रास्ते (FEMALE)
विधिः नफ़रत है मुझे इस शहर से। भाग जाना चाहती हूँ मैं यहाँ से! मेरे लायक़ नहीं है यह शहर। इस जगह के लिए बहुत modern हूँ मैं । मैं किसी बड़े काम के लिये पैदा हुई थी, यहाँ 24 घंटे इस शहर के बेवक़ूफ़ों से बात करने के लिए नहीं। मन करता है कि बस सबको धक्का मारते हुए यहाँ से बस भाग जाऊँ ताकि यहाँ के लोगों को मेरे होने का एहसास हो, जो मैं feel करती हूँ उसका एहसास हो। ये सब इस तरह से रह कैसे सकते हैं? सब लोग एक जैसे दिखते हैं, एक जैसे कपड़े पहनते हैं, सब कहीं खोए हुए, परेशान, बस जी रहे हैं और मरने का इंतज़ार कर रहे हैं। लेकिन मैं सिर्फ़ जियूँगी नहीं और ना हमेशा इन रास्तों पे चलने वाली हूँ। बस खोयी हुई। बिलकुल नहीं। मैं यहाँ से निकल जाऊँगी, इन गलियों से बाहर इस शहर से बाहर। नए लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने। चली जाऊँगी मैं।
इज़्ज़त (MALE)
रोहन : तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई दीपक अख़बार में मेरे बारे में ये बकवास लिखने की? पिछले दस साल से जानता हूँ मैं तुम्हें और तुमने बिना सोचे समझे, बिना कोई छानबीन किए मेरा नाम और मेरी reputation ऐसे उछाल दी? तुम्हें कैसे पता ये सब? कैसे जानते हो तुम कि ये जो allegations मुझ पर लगाए गए हैं ये सच भी हैं या नहीं? तुम्हारे पास कोई source नहीं है कोई सबूत नहीं हैं और तुमने बस छाप दिया?
selfish हो तुम। तुम्हें ये खबर बस लोगों तक पहुचानी थी ताकि तुम एक बड़े journalist कहलाओ। तुम्हारा नाम हो। और इस के लिए मेरा चाहे कितना भी नुक़सान हो उससे कोई मतलब नहीं है तुम्हें। क्यों, ठीक कह रहा हूँ ना मैं?
लेकिन ऐसा होगा नहीं दीपक। बरबाद कर दूँगा मैं तुझे ठीक उसी तरह जिस तरह तूने मुझे बरबाद करने की कोशिश की है। तू तो मुझे अच्छे से जानता है ना। फिर क्यों किया? बोल क्यों किया ऐसा? मैं ही क्यों?
तुझे पैसा मिला है ना किसी से इस काम के लिए? मेरे competitors से? है ना? यही बात है ना तो अब देख तू मेरा असली रंग।
दोस्त मानता था मैं तुझे। एक अच्छा इंसान समझता था जिसे लोगों की परख है। मैं ही बेवक़ूफ़ निकला और तुझे समझने में गलती कर दी। देख नहीं पाया तेरी सच्चाई।
लेकिन तू याद रखना… ये बात यहाँ खतम नहीं हुई है….
Dinner (FEMALE)
आज डिनर में क्या बनाओगी?
“डिनर?! तुम्हें डिनर की पड़ी है?! मतलब एक बार सोचो, एक बार! ये इंसान सुबह से mental torture झेल रही है, और तुम्हें बस डिनर की चिंता हो रही है?!
मैं क्या कोई 5-star chef हूँ जो बस रोज़ नए-नए menu बनाऊँ?! मतलब, मुझे दिन भर और कोई काम नहीं है? सुबह उठते ही lecture, दोपहर तक comparison, और शाम तक character analysis! ऊपर से तुम भी आ कर डिनर का syllabus revise करवा रहे हो!
“बेटा, तुम्हारी उम्र में तो हम…”
“बेटा, ये कौन सा fashion है?”
“बेटा, फोन पे मत घूरो!”
मतलब, कुछ भी कर लो, कुछ भी! ये लोग एकदम perfection के poster हैं और मैं दुनिया की सबसे बेकार इंसान!
और हाँ, मुझे पता है! तुम बस casually पूछ रहे थे! casual?! क्या होता है casual?! casual तो बस shopping होती है, dates होती हैं… पर life?! लाइफ़ casual नहीं होती! लाइफ़ एक constant viva एग्जाम है जिसमें answer चाहे जो दो, examiner हमेशा “हम्म, थोड़ा और मेहनत करो” कहकर छोड़ देता है!
बस! मैं decide कर चुकी हूँ। आज डिनर मैं नहीं बना रही। आज तुम बनाओगे! और आज के बाद दुबारा डिनर के बारे में पूछ मत लेना और अगर ऐसा किया तो मैं या तो chef बन जाऊँगी या साधु! और दोनों ही केस में तुमसे breakup पक्का है!
(गहरी साँस लेती है, थोड़ा शांत होती है और बड़बड़ाते हुए कहती है।)
अच्छा सुनो… मैगी बना लेना
उधार (MALE)
अभय: हर बार यही होता है। एक साल से इंतज़ार कर रहा हूँ मैं कि तू मेरे मेरे पैसे वापस करेगा; और तुझे ये तक याद नहीं कि तूने पैसे लिये कितने थे। और इसके बाद पता है क्या होगा? फिर तू कहेगा की मेरा कोई उधार ही नहीं है तुझ पर!! तुझे लगेगा की तूने मेरे पैसे वापस कर दिये हैं या तूने मुझसे कभी लिए ही नहीं थे। और मेरा यहाँ खड़े खड़े कट जाएगा। उधार वापस भी करने होते हैं मेरे भाई। credit card की company नहीं हूँ मैं और ना ही मेरे बाप का bank है कोई। तेरे उन सटोरी दोस्तों की तरह interest भी charge नहीं करता मैं तुझसे। दोस्त हूँ तेरा। कम से कम इतना तो याद रख सकता है ना तू कि पैसे थे कितने! मत कर वापस अगर नहीं करने तो, चलेगा मेरे को। लेकिन भाई भूल तो मत कम से कम कि उधार लिया था तूने। हर बार ऐसा लगता कि साला तू मेरा फ़ायदा उठा कर चला गया। दुबारा तूने मेरे साथ ये चूतियाप किया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।
5,000 रुपये लिए है तूने। ध्यान रखना अगली बार। 5,000
जानवर( FEMALE)
जिया: मुझे तो अब ये भी नहीं पता कि तुम्हारा असली चेहरा कौनसा है। तुम्हारे साथ इस घर में shift होने के बाद जब तुम्हें क़रीब से देखा तो पता लगा की तुम क्या हो। पहले मुझे लगता था कि तुम्हारा ये हर रोज़ का शराब पीना शायद बस एक शौक़ है जो धीरे धीरे कम हो जाएगा लेकिन time के साथ साथ it has only gotten worse। और कल रात को जो तुमने किया…
जानवर बन गये थे तुम कल रात को। अपने ऊपर से तुम्हें हटाने के लिए क्या नहीं किया मैंने। तुम्हे मारा, ज़ोर ज़ोर से चिल्लाई लेकिन तुम पर तो जैसे वहशीपन सवार था। अपने हाथों से मेरा मुँह बंद कर के जिस तरह तुम मेरे शरीर को अपने नीचे दबा रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे सड़क का कोई गुंडा मेरा शरीर नोच रहा हो।
डर लगता है अब मुझे तुमसे। हर वक़्त डरती हूँ की तुम फिर से वही जानवर बन जाओगे और अगर मैंने वो बोतल तुम्हारे सर पे ना मारी होती तो पता नहीं क्या हो जाता! पता नहीं तुम कहाँ तक जाते और मेरे साथ क्या करते।
मेरी नज़रों में तुम अब एक जानवर बन गये हो और अब मैं तुम्हारी ये image अपनी नज़रों से हटा नहीं सकती।ना ही मैं उसे हटा सकती हूँ और ना अब हटाना चाहती हूँ।
HOMOSEXUAL ( FEMALE)
मैं मनु अपने नाम की तरह सब के मन को हमेंशा भा लेती हूं, सब मुझसे बहुत प्यार करते हैं, मेरा भाई, मेरे पापा, मेरी मम्मी। सब ने हमेंशा मुझे प्यार दिया, मेरी हर बात हमेंशा हस्ते – हस्ते मान ली। लेकिन, जब मेरे प्यार की बात आई! ना जाने क्यों उन्हें उसे मानने से मना कर दिया। मेरा प्यार, मेरी दिशा...
क्या हुआ? आप सब-आप सब चौक क्यों गए? क्या आप लोग भी मुझे और मेरी दिशा को नहीं अपनाएंगे? क्या हमने कुछ गलत किया है? मैंने तो हमेशा सुना था की सच्चा प्यार कभी-भी किसे के रंग–रूप, चेहरे को देख के नहीं होता!! वो बस हो जाता है..
तो मेरे प्यार में क्या गलत है? क्योंकि वो एक लड़की है!
क्या एक लड़की का लड़की से प्यार करना गलत हैं ?
मुझे लगा कमसे-कम आप लोग तो हमारे प्यार को समझेंगे, लेकिन मैं! मैं! तो भूल ही गई कि ये, समाज! आप-आप ही लोग हमारे प्यार के दुश्मन हैं, हमें जज करने वाले हैं, गाली देने वाले हैं तो आप सब ही हैं।ये मैं केसे भूल गई।
जहां एक अंजान से शादी करना तो ठीक है, लेकिन किसी से प्यार करना गलत है।
प्यार करो तो उसमें नियम और शर्तें लागू करो, किसी से हँस-खेल के बात करो तो CHARACTERLESS का टैग पाओ।।
लड़को के साथ उठने–बैठने से मन करो, फ्रेंड सर्कल में सिर्फ लड़की होनी चाहिए ये बात बार-बार दोहराओ।
लेकिन जब उसी लड़की से प्यार हो जाए तो HOMOSEXUAL कहलो।
हा। हा।हू मैं HOMOSEXUAL!
एक लड़की हूं और एक लड़की से ही प्यार करती हूं।मैं जो हूं वो हूं, यही मेरा सच्चा व्यक्तित्व है और मुझे अपने आप पर गर्व है।